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पूर्ण टीका करण के बावजूद भी लोग कोविड-19 से संक्रमित क्यों हो रहे हैं?

This article was published on
July 27, 2021

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जैसे-जैसे डेल्टा का रूपांतर दुनिया भर में प्रभावी हो रहा है, वैसे-वैसे टीकाकरण पूरा हुए लोगों की कोविड-19 से संक्रमित होने की अंतर्राष्ट्रीय और ऑस्ट्रेलियाई रिपोर्टें मिल रही है। इन तथाकथित 'टीकों को तोड़ने वाले संक्रमणों" ने टीकों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन देशों में टीकाकरण की दर ज्यादा है वहां से मिल रहा डेटा भी बता रहा है कि कोविड-19 के साप्ताहिक मामले टीकाकरण वाले लोगों में अन्य लोगों के मुकाबले अधिक हैं - क्या इसका मतलब यह है कि टीके काम नहीं कर रहे हैं? नीचे ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

जैसे-जैसे डेल्टा का रूपांतर दुनिया भर में प्रभावी हो रहा है, वैसे-वैसे टीकाकरण पूरा हुए लोगों की कोविड-19 से संक्रमित होने की अंतर्राष्ट्रीय और ऑस्ट्रेलियाई रिपोर्टें मिल रही है। इन तथाकथित 'टीकों को तोड़ने वाले संक्रमणों" ने टीकों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन देशों में टीकाकरण की दर ज्यादा है वहां से मिल रहा डेटा भी बता रहा है कि कोविड-19 के साप्ताहिक मामले टीकाकरण वाले लोगों में अन्य लोगों के मुकाबले अधिक हैं - क्या इसका मतलब यह है कि टीके काम नहीं कर रहे हैं? नीचे ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

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प्रोफेसर इयान मार्शनर

सिडनी विश्वविद्यालय के NHMRC नैदानिक परीक्षण केंद्र में बायोस्टैटिस्टिक्स के प्रोफेसर

,

सिडनी विश्वविद्यालय

हितों का संघर्ष: शून्य

ऑस्ट्रेलियाई विज्ञान मीडिया सेंटर द्वारा प्राप्त कोट

टीकाकरण संक्रमण को खत्म नहीं करता लेकिन गंभीर संक्रमण और मौत को बहुत कम कर देता है। उच्च टीकाकरण दर वाले देश जैसे इज़राइल में तार्किक रूप से वैक्सीन लगवा चुके लोगों में अधिक संक्रमण मिलेगा क्योंकि ज़्यादातर लोगों को टीका लग चुका है। वास्तव में, यदि किसी देश की टीकाकरण दर 100 प्रतिशत हो तो 100 प्रतिशत संक्रमण टीकाकरण पा चुके लोगों से हासिल होंगे। इसका ये मतलब नहीं है कि टीका काम नहीं कर रहा है। इसके विपरीत, इसका अर्थ है कि अनेक लोगों को अस्पताल में भर्ती होने और मौत के मुंह में जाने से बचाया जा रहा है।


एसोसिएट प्रोफेसर पॉल ग्रिफिन

मेटर स्वास्थ्य सेवा में संक्रामक रोगों को निदेशक और मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर

,

क्वीन्सलैंड विश्वविद्यालय

हितों का संघर्ष: पॉल अनेक कोविड-19 टीका अध्ययन चला रहे हैं। वे AstraZeneca सहित अनेक उद्योग सलाहकार बोर्ड में भी हैं।

ऑस्ट्रेलियाई विज्ञान मीडिया सेंटर द्वारा प्राप्त कोट

ब्रेकथ्रू संक्रमणों को इन अत्यधिक प्रभावी टीकों के लाभों से दूर जाने के कारणों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जबकि हम जानते हैं कि सामान्यीकरण के रूप में मृत्यु से सुरक्षा लगभग 100 प्रतिशत है, और रोगसूचक संक्रमण की स्थिति में 70 से 90 प्रतिशत के आस पास है, वे संक्रमित होने की संभावना को भी कम करते हैं।


यह देखते हुए कि यह सुरक्षा 100 प्रतिशत नहीं है, परिभाषा के अनुसार इसका मतलब है कि जिन लोगों को टीका लगाया गया है वे अभी भी संक्रमित हो सकते हैं। टीका न लगवाने वाले व्यक्ति की तुलना में टीका लगवाने वाले व्यक्ति में इन ब्रेकथ्रू संक्रमणों के गंभीर होने की संभावना बहुत कम है और वे दूसरों को संक्रमित करने की भी कम संभावना रखते हैं।


यह उलझन का विषय है कि जब टीकाकरण करने वाले लोगों की संख्या बढ़टि है तो पूरी तरह से टीकाकरण पाने वाले लोगों में मामलों की संख्या भी बढ़ती है, भले ही यह टीकाकरण न कराने की स्थिति में होने वाले संक्रमण की दर से बहुत कम हो और दोनों स्थितियों की तुलना की जाए तो यह काफी कम हो।


कुछ देशों में पूरी तरह से टीकाकरण पाए जाने वाले लोगों के भी संक्रमित होने की संभावना थोड़ी अधिक होती है क्योंकि उन्हें सही तौर पर अपने गैर-टीकाकरण समकक्षों की तुलना में अधिक स्वतंत्रता दी जाती है। उनके अनुमानित जोखिम में भी कमी हो सकती है और उनके खुद को बचाने के लिए सामाजिक दूरी, हाथ की स्वच्छता और मास्क पहनने जैसी अन्य रणनीतियों का उपयोग करने की संभावना कम हो सकती है।


हालांकि निश्चित है कि आदर्श स्थिति में एक ऐसा टीका होगा जो 100 प्रतिशत संक्रमणों को रोकता हो, यह कतई संभव नहीं है (हालांकि टीकों को विकसित करने के लिए काम चल रहा है जो इसे कम से कम थोड़ा बेहतर कर सकते हैं), इसलिए संभव है कि पहले से ही उपयोग किए जाने वाले अत्यधिक प्रभावी टीकों जैसे टीकों के अलावा, हमें कुछ अतिरिक्त आम शमन रणनीतियों जैसे कि मास्क पहनना, हाथ की स्वच्छता, सामाजिक दूरी और परीक्षण की उच्च दर की आवश्यकता होगी यह सुनिश्चित करने के लिए कि हम वायरस के साथ रह सकें और हमारे दैनिक जीवन और आजीविका पर इसके प्रभाव को कम कर सकें।


·         ब्रेकथ्रू संक्रमण क्या होते हैं?


जब तक कोई टीका 100 प्रतिशत समय संचरण को नहीं रोकता है (जो अनिवार्य रूप से संभव नहीं है, पोलियो टीका शायद इसके सबसे पास आता है), तब तक टीकाकरण हासिल कर चुके व्यक्तियों के संक्रमित होने की संभावना रहेगी। इनको ब्रेकथ्रू संक्रमण कहा जाता है। हालांकि यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह कई कारणों से टीके की विफलता को नहीं दर्शाता है और ब्रेकथ्रू संक्रमण होने के बावजूद टीका लगवाने वाले लोगों की टीका नहीं लगवाने वाले लोगों की तुलना में संक्रमित होने की संभावना कम होती है।


हालांकि ब्रेकथ्रू संक्रमण होते हैं, पूरी तरह से टीकाकरण करा चुके लोग;


लक्षात्मक रोग से कम संभावित रूप से संक्रमित होंगे


गंभीर रोग से कम संभावित रूप से पीड़ित होंगे


लगभग पूरी तरह से मौत से सुरक्षित होंगे


कम संभावित रूप दूसरों को संक्रमित करेंगे


एक समझे जाने वाला महत्वपूर्ण विरोधाभास है कि हालांकि यह स्पष्ट है कि पूरी तरह से टीकाकरण वाले व्यक्तियों में संक्रमण होने की संभावना कम होती है, एक बार जब आबादी में टीकाकरण वाले लोगों का अनुपात बढ़ जाता है, तो यह संभावना होती है कि टीका न लगवाने वाले व्यक्तियों की तुलना में टीका न लगवाने वालों में अधिक मामले होंगे। जिन लोगों को टीका लगाया गया है, उनमें संक्रमण की दर उन लोगों की तुलना में कम रहेगी जिन्हें टीका नहीं लगाया गया है, लेकिन क्योंकि टीका लगे लोगों की संख्या इतनी अधिक होगी, कम दर होने पर भी इस समूह में संख्या  टीका नहीं लगे लोगों से अधिक होगी। यह इस बात का सबूत नहीं है कि टीका काम नहीं करता है, बस इसका कि डिनॉमिनेटर बदल गया है।


टीका लगे और टीका न लगे व्यक्तियों के बीच संक्रमण दर की तुलना करते समय हमें दो समूहों के बीच व्यवहार में परिवर्तन को भी ध्यान में रखना होगा। लोगों को टीका लग जाने के बाद, बीमारी से जोखिम के बारे में उनके खतरे का अनुमान कम हो जाएगा, इसलिए उनमें खुद को बचाने के लिए अन्य सभी रणनीतियों को अपनाने की संभावना कम होती है। हम यह भी देख रहे हैं कि कई देश टीकाकरण वाले लोगों को अतिरिक्त स्वतंत्रता की अनुमति सही ही देते हैं ताकि उनके घूमने और अधिक लोगों के साथ संवाद कर पाने की अधिक संभावना हो। इसका अर्थ यह है कि वे वास्तव में अपने टिक न लगवाने वाले समकक्षों के मुकाबले अपने संक्रमित होने के जोखिम को बढ़ाते हैं, जिसका अर्थ है कि यदि वे टीके द्वारा सुरक्षित नहीं होते तो उनमें वास्तव में संक्रमण की दर और इससे होने वाली जटिलताएं बहुत अधिक होती।


·         उच्च वैक्सीन दरों वाले देशों से वास्तविक विश्व डेटा हमें टीकों की गंभीर संक्रमण/मृत्यु की तुलना में सभी संक्रमणों को रोकने की क्षमताओं के बारे में क्या दिखा रहा है?


ज्यादातर चर्चित प्रभावकारिता और प्रभावशीलता रोगसूचक प्रमाणित रोग से संबंधित हैं। इसलिए नहीं कि यह टीके का एकमात्र प्रभाव हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि ये नैदानिक ​​परीक्षणों में मापे गए प्राथमिक परिणाम थे। संक्रमण में होने वाली कमी को मापना कठिन है इसलिए वैक्सीन के नैदानिक ​​परीक्षणों के आशाजनक परिणाम आने के कुछ समय तक, हमें कहना पड़ा था कि हम अभी तक नहीं जानते कि टीके संक्रमण को कितना कम करते हैं। दुर्भाग्य से, कुछ लोगों ने इसका यह मतलब निकाला कि टीके संक्रमण को नहीं रोकते हैं, हालांकि ऐसा नहीं है। हमारे अब टीकों के संक्रमण को कम करने के बारे में जानने के तरीकों में यह शामिल हैं;


पशुओंं के अध्ययन से संक्रमण दर में कमी और संक्रमित पशुओंं में पैदा होने वाले वायरस की मात्रा में कमी पाई गई, इनमें से कुछ 100% सुरक्षा के करीब थे।


घरेलू संचरण अध्ययन जहाँ टीके लगाए गए और न लगाए गए व्यक्तियों में संचारण दर की तुलना की गई से पता चला है कि आम तौर पर 40 से 60% के क्रम में कमी दिखा रहे हैं


लक्षणहीन संक्रमणों को मापने पर, इन्हें 60 से 90% के क्रम में कम पाया जाता है


संक्रमित व्यक्तियों में पता लगाए गए वायरस की मात्रा को मापने से, वायरल शेडिंग में कमी एक उपयोगी सरोगेट (निश्चित प्रमाण नहीं) संचरण की कमी है, विभिन्न अध्ययनों ने संकेत दिया है कि टीके शायद 50 से 67% के क्रम में ऐसा करते हैं।


यह भी सही समझ आता है कि यदि हम टीके लगाए गए लोगों में लक्षणों की कम या कम अवधि देखते हैं, और उनमें से कुछ संचारण करने की क्षमता में योगदान करते हैं, जैसे कि खांसी, तो टीका लगाए गए व्यक्तियों के संचारण की संभावना कम होती है।


·         क्या ब्रेकथ्रू संक्रमण का ये अर्थ है कि ऑस्ट्रेलिया को प्रतिबंधों को बनए रखना होगा?


यह देखते हुए कि टीके 100% वक्त संक्रमण को नहीं रोकते, यह बहुत संभव है कि हमें निकट भविष्य के लिए कुछ शमन रणनीतियों को जारी रखने की आवश्यकता होगी। इसका अर्थ ये हो सकता है कि हम समुदाय में अतिसंवेदनशील लोगों को संक्रमित होने से बचाने से टीकाकरण के प्रभाव को बढ़ा सकते हैं, साथ ही कुछ बुनियादी मौलिक शमन रणनीतियों को भी जारी रख सकते हैं जिन्हें हमने टीके होने के पहले ही बड़ी सफलता के साथ उपयोग किया है। इसमें शामिल हैं सामाजिक दूरी, हाथ की स्वच्छता, जाँच करवाना और यदि श्वसन संबंधी कोई लक्षण हों तो तब तक अलग रेहना जब तक आप स्वस्थ न हों, साथ ही मास्क पहनना विशेष रूप से उच्च जोखिम वाली सेटिंग जैसे कि हवाई यात्रा या ऐसे लोगों के लिए जिन्हें किसी भी कारण से टीका नहीं लगाया जा सकता है। हालांकि हम इस समय पूरी तरह खत्म करने के लिए कोई लक्ष्य नहीं बना रहे हैं, ऐसी सरल शमन रणनीतियों के साथ, जिनका लोगों के दिन-प्रतिदिन के जीवन पर कम से कम प्रभाव होना चाहिए, एक उच्च स्तर के नियंत्रण की उम्मीद होनी चाहिए। यदि काफी लोगों को टीका लग जाता है, तो घरेलू सीमा प्रतिबंध और लॉक डाउन जैसे कठोर उपायों की आवश्यकता नहीं रहनी चाहिए।


·         क्या ब्रेकथ्रू संक्रमण चिंताजन नए वैरिएंट के निर्माण करेंगे?


नए वैरिएंट उत्पन्न करने वाले म्यूटेशन के लिए, वायरस को एक मेजबान, यानी संक्रमित लोगों में प्रजनन करना पड़ता है। किसी आबादी में जितने कम संवेदनशील मेजबान होंगे, इन म्यूटेशन के होने की संभावना उतनी ही कम होगी। निश्चित रूप से, ब्रेकथ्रू संक्रमण का मतलब है कि नए वैरिएंट के उत्पन्न होने का जोखिम कभी भी शून्य तक होने की संभावना नहीं है, लेकिन जितने अधिक लोग टीकाकरण करेंगे, नए वैरिएंट के पैदा होने के अवसर उतने ही कम होंगे।


·         ब्रेकथ्रू संक्रमण का भविष्य में ऑस्ट्रेलिया के कोविड के साथ रहने के लिए क्या अर्थ है?


मेरी राय में इसका अर्थ है कि हमें इस वायरस के साथ जीने का तरीका सीखना होगा। हमें इसे सर्वोत्तम रूप से नियंत्रित करने का लक्ष्य रखना चाहिए ताकि स्वयं वायरस का प्रभाव, और इसे नियंत्रित करने के लिए आवश्यक शमन रणनीतियों का हमारे दैनिक जीवन पर कम से कम प्रभाव पड़े। मुझे लगता है कि ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीका है टीकाकरण की दर अधिक से अधिक हो और जिन लोगों का पूरी तरह से टीकाकरण हो गया है उन्हें अतिरिक्त स्वतंत्रता का आनंद लेने की अनुमति दी जाए जिसके वे हकदार हैं, क्योंकि वे सुरक्षित हैं। फिर हमें हाथ की स्वच्छता, सामाजिक दूरी, मास्क और परीक्षण की उच्च दर सहित संचारण को और कम करने के लिए कुछ बुनियादी रणनीतियों का उपयोग करना होगा जिससे कि हम ये पता लगा सकें कि मामले कहाँ हैं और उनके वायरस को और फैलाने की संभावना को कम कर सकें। इसके रहते, बेहतर उपचारों के साथ, जो आशा से बहुत दूर नहीं हैं, यह मतलब होना चाहिए कि हालांकि हमें हमेशा सतर्क रहना होगा, हम उम्मीद कर सकते हैं कि हम ऊपरी हाथ हासिल करें और भविष्य में इस वायरस के प्रभाव को कम कर सकें।


डॉ रोजर लॉर्ड

ऑस्ट्रेलियाई कैथोलिक विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य विज्ञान के विभाग में वरिष्ठ लेक्चरर (चिकित्सीय विज्ञान) और प्रिंस चार्ल्स अस्पताल (ब्रिसबेन) के विजिटिंग रिसर्च फेलो

हितों का संघर्ष: शून्य

ऑस्ट्रेलियाई विज्ञान मीडिया सेंटर द्वारा प्राप्त कोट

दुनिया के कई हिस्सों में कोविड-19 से संक्रमण फिर से बढ़ रहे हैं। ये ब्रेकथ्रू संक्रमण कोई विफलता नहीं हैं, बल्कि उपलब्ध कोविड-19 टीकों की एक सीमा है, किसी की भी 100 प्रतिशत प्रभावकारिता नहीं है।


इसके अतिरिक्त, वर्तमान में सुरक्षा का कोई सहसंबंध नहीं है (सुरक्षा के लिए आवश्यक एंटीबॉडी सांद्रता और/या टी सेल सक्रियण का स्तर) यह संकेत करने के लिए कि दीर्घकालिक सुरक्षा का संकेत करने के लिए किस सांद्रता की आवश्यकता है, क्या इसे किसी दिए गए व्यक्ति में हासिल किया गया था या यह कितने समय तक चलेगा। टीकाकरण खुद प्रतिरक्षण के तुल्य नहीं होता है।


यह आश्चर्य की बात नहीं है कि जिन देशों में टीकाकरण की उच्च दर मौजूद है, वहाँ बिना टीका लगे व्यक्तियों की तुलना में टीकाकरण वाले लोगों को कोविड-19 का संक्रमण अधिक हुआ है। उदाहरण के लिए, यदि 80 प्रतिशत आबादी का पूरी तरह से टीकाकरण हुआ है और 20 प्रतिशत का नहीं तो सांख्यिकीय रूप से अधिक टीकाकरण वाले लोग कोविड-19 से संक्रमित हो सकते हैं।


महत्वपूर्ण संदेश यह है कि हालांकि एक व्यक्ति टीकाकरण व्यवस्था के बाद भी कोविड-19 से संक्रमित हो सकता है, उसके अनुभव किए गए लक्षण उतने गंभीर नहीं होंगे और अस्पताल में भर्ती होने की संभावना कम होगी।


निश्चित यही मामला है यूनाइटेड किंगडम (यूके) में जहाँ टीकाकरण दर अधिक रही है।


यूके में कोविड-19 मामलों की संख्या अधिक संचरित होने योग्य डेल्टा वैरिएंट के उभार के कारण बढ़ रही है, हालांकि टीकाकरण वाले व्यक्तियों में अस्पताल में भर्ती होने वाले व्यक्तियों की संख्या कम है।


ऑस्ट्रेलिया में जहाँ टीकाकरण की दर अभी भी काफी कम है, कोविड-19 का संचरण अभी भी अधिक है और जब तक आबादी के एक बड़े प्रतिशत को टीका नहीं लगाया जाएगा तब तक यह कम नहीं होगा।


जब आबादी के एक बड़े प्रतिशत का टीकाकरण हो जएगा तब बार-बार लॉकडाउन होना अतीत की बात हो जाएगी। ऐसा होने तक व्यक्तियों को समुदाय में व्यापक रूप से वायरस के प्रसार को कम करने में मदद करने के लिए मास्क पहनना जारी रखना होगा।


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